मैनपुरी के करहल से चुनाव लड़ेंगे अखिलेश:2007 से सपा यहां से लगातार जीतती रही है, 2017 की मोदी-योगी लहर में भी पार्टी को 50% वोट प्राप्त हुआ था
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से जुड़ी बड़ी खबर है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव मैनपुरी की करहल सीट से चुनाव में उतरेंगे । इस सीट पर 2007 से सपा लगातार जीतती आ रही है। 2017 के चुनाव में मोदी-योगी की लहर के बावजूद यहां सपा प्रत्याशी सोबरन सिंह को 50% वोट मिले थे। हालांकि, अभी आधिकारिक तौर पर न तो पार्टी ने और न ही अखिलेश ने इसकी घोषणा की है। इससे पहले अखिलेश के आजमगढ़ से चुनाव लड़ने की चर्चा थी। खुद अखिलेश ने कहा था कि आजमगढ़ की जनता से पूछकर वह चुनाव लड़ने का निर्णय करेंगे।
दरअसल, करहल विधानसभा सैफई के करीब है। यहां सपा मुखिया के परिवार का काफी प्रभाव है। पिछले तीन बार से यहां से सपा के सोबरन यादव विधायक हैं। उनके सिर पर पर मुलायम का हाथ बताया जाता है। 2017 के चुनाव में सपा उम्मीदवार सोबरन सिंह यादव ने 104221 वोट पाकर भाजपा के राम शाक्य को 38405 वोट से हरा दिया था |
मैनपुरी में सपा के जिला संगठन ने लिखित रूप में गुरुवार को सपा मुखिया अखिलेश यादव को करहल विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने का प्रस्ताव सौंपा। करहल के सपा विधायक सोबरन सिंह यादव और एमएलसी अरविंद प्रताप सिंह गुरुवार सुबह लखनऊ पहुंचे। उनकी पार्टी कार्यालय में राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात हुई। मुलाकात में सभी ने अखिलेश यादव से अनुरोध किया कि वह करहल विधानसभा से चुनाव लड़ें। जिलाध्यक्ष के मुताबिक राष्ट्रीय अध्यक्ष ने प्रस्ताव पर सकारात्मक रुख दिखाया है।
2007 से यहां कभी नहीं हारी सपा
2007 में सपा प्रत्याशी संध्या कठेरिया ने जीत हासिल की। इसके बाद सपा के ब्रजेश कठेरिया 2012 में जीते। 2017 में पूरे प्रदेश में भाजपा की प्रचंड लहर चली, लेकिन यहां उसका असर नहीं हुआ | बीते चुनाव में सपा के ब्रजेश कठेरिया को ही । बीते चुनाव में भाजपा दूसरे नंबर पर रही थी। सुरक्षित होने के बाद भी इस सीट पर बसपा कभी जीत हासिल नहीं कर पाई है। 2002 में जरूर इस सीट पर भाजपा ने जीत हासिल की थी।
1993 से चला सपा का रथ 2002 में जिस भाजपाई ने रोका...अगले चुनाव में वह सपा के हो गए
मैनपुरी की करहल सीट पर 1993 से सपा जीतती आ रही थी। यानी अब तक 6 चुनाव हुए, जिसमें 5 बार सपा और एक बार भाजपा को जीत हासिल हुई है । 2002 में सोबरन सिंह यादव ने भाजपा के टिकट पर लड़ते हुए सपा का विजय रथ रोक दिया था। उस चुनाव में सपा के अनिल कुमार यादव दूसरे स्थान पर रहे थे। मगर 2007 के चुनाव में सोबरन सिंह यादव सपा के टिकट पर ही चुनाव में उतरे। तब से लगातार वह सपा के टिकट पर यहां विधायक हैं।
सैफई के करीब है करहल, मुलायम का है प्रभाव
करहल विधानसभा क्षेत्र सैफई के बिल्कुल करीब है। यहां मुलायम सिंह यादव का काफी दखल रहा है। विधायक सोबरन सिंह यादव पर भी मुलायम का ही हाथ माना जाता रहा है। इस सीट पर यादव परिवार का दबदबा ऐसा है कि 2017 की मोदी-योगी लहर में भी इस सीट पर सोबरन सिंह यादव को 49.81% वोट मिले थे।
1957 से अब तक सिर्फ एक बार भाजपा जीती है यहां
करहल विधानसभा सीट का इतिहास बताता है कि 1957 से अब तक यहां सिर्फ एक बार 2002 में भाजपा जीती है। 1980 में यह सीट एक बार कांग्रेस के खाते में भी गई है। 1957 के पहले चुनाव में यहां प्रजा सोशलिस्ट पार्टी जीती थी। उस समय यहां दो सीटें हुआ करती थीं। 1985 से 2002 तक यहां बाबू राम यादव विधायक रहे। खास बात ये है कि वे 1985 से 1989 तक लोक दल से, 1989 से 1991 तक जनता दल से, 1991 से 1992 तक जनता दल (सेक्युलर) से और फिर 1993 से 2002 तक समाजवादी पार्टी से विधायक रहे।
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